✨ Govardhan Puja 2026
गोवर्धन पूजा 2026 (Govardhan Puja 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
10 नवम्बर 2026, मंगलवार
लेखक:
Pt. Jitendra Vyas
· अपडेटेड: 17 अक्टूबर 2026
तारीख
10 नव. 2026
तिथि
कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि
शुभ मुहूर्त
सुबह 6:40 बजे से - सुबह 8:52 बजे तक
गोवर्धन पूजा 2026 का महत्व
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त:
गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर को मनाई जाएगी।
● प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6:40 बजे से सुबह 8:52 बजे तक।
● प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:33 बजे।
● प्रतिपदा तिथि का समापन: 10 नवंबर 2026 को दोपहर 2:02 बजे।
गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है?
गोवर्धन पूजा का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की लीला का स्मरण कराने के साथ-साथ प्रकृति, अन्न और पशुधन के महत्व को भी दर्शाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाया था। इसी घटना की स्मृति में गोवर्धन पूजा मनाई जाती है।
इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धनधारी स्वरूप की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। घरों और मंदिरों में तरह-तरह के पकवान बनाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं। इस परंपरा को अन्नकूट कहा जाता है।
कई स्थानों पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की जाती है। गोमाता की सेवा करना, उन्हें चारा खिलाना और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
गोवर्धन पूजा हमें सिखाती है कि मनुष्य का जीवन प्रकृति और उसके संसाधनों पर निर्भर है। इसलिए पर्वतों, पेड़-पौधों, जल, अन्न और जीव-जंतुओं का सम्मान करना चाहिए। यह त्योहार अहंकार छोड़ने, विनम्रता अपनाने और समाज के साथ मिलकर रहने की प्रेरणा भी देता है।
गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर को मनाई जाएगी।
● प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6:40 बजे से सुबह 8:52 बजे तक।
● प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:33 बजे।
● प्रतिपदा तिथि का समापन: 10 नवंबर 2026 को दोपहर 2:02 बजे।
गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है?
गोवर्धन पूजा का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की लीला का स्मरण कराने के साथ-साथ प्रकृति, अन्न और पशुधन के महत्व को भी दर्शाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाया था। इसी घटना की स्मृति में गोवर्धन पूजा मनाई जाती है।
इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धनधारी स्वरूप की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। घरों और मंदिरों में तरह-तरह के पकवान बनाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं। इस परंपरा को अन्नकूट कहा जाता है।
कई स्थानों पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की जाती है। गोमाता की सेवा करना, उन्हें चारा खिलाना और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
गोवर्धन पूजा हमें सिखाती है कि मनुष्य का जीवन प्रकृति और उसके संसाधनों पर निर्भर है। इसलिए पर्वतों, पेड़-पौधों, जल, अन्न और जीव-जंतुओं का सम्मान करना चाहिए। यह त्योहार अहंकार छोड़ने, विनम्रता अपनाने और समाज के साथ मिलकर रहने की प्रेरणा भी देता है।
गोवर्धन पूजा 2026 पूजा विधि
1
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा श्रद्धा और परंपरा के अनुसार की जाती है। घर पर पूजा करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं।
2
स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को साफ करें और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए सुख-शांति की कामना करें।
3
गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं: परंपरा के अनुसार, स्वच्छ स्थान पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। आसपास फूलों और पत्तियों से सजावट कर सकते हैं।
4
पूजा सामग्री तैयार करें: रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, जल, फल, मिठाई और भोग की सामग्री एकत्र करें।
5
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें: भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें पुष्प, अक्षत और फल अर्पित करें। गोवर्धन पर्वत की आकृति की भी श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
6
अन्नकूट का भोग लगाएं: घर में तैयार किए गए विभिन्न पकवान, सब्जियां, मिठाइयां और अन्य शाकाहारी व्यंजन भगवान को अर्पित करें। भोग में अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामग्री रखें।
7
गोमाता की सेवा करें: संभव हो तो गोमाता को हरा चारा या उचित आहार खिलाएं। उनकी देखभाल और सेवा का संकल्प लें।
8
गोवर्धन पूजा की कथा सुनें: परिवार के सदस्यों के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत से जुड़ी पौराणिक कथा पढ़ें या सुनें।
9
आरती और प्रसाद वितरण करें: पूजा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें। प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बाँटें। सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन भी कराएं।
गोवर्धन पूजा की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रज में रहने वाले लोग वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। उनका विश्वास था कि इंद्र की कृपा से वर्षा होती है, जिससे खेतों में फसल उगती है और लोगों को अन्न प्राप्त होता है।
एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उनके जीवन में गोवर्धन पर्वत, गायों और प्रकृति का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने लोगों को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया।
जब इंद्र को इस बात का पता चला, तो उन्हें क्रोध आ गया। उन्होंने ब्रज में तेज वर्षा और तूफान भेज दिया। लगातार बारिश होने से ब्रजवासियों के सामने संकट खड़ा हो गया।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। ब्रज के लोग, ग्वाल-बाल और गोमाता पर्वत के नीचे आकर सुरक्षित हो गए। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक पर्वत को उठाए रखा और सभी की रक्षा की।
अंततः इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उनका अहंकार समाप्त हो गया। इसके बाद ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आभार व्यक्त किया और उन्हें विभिन्न पकवानों का भोग लगाया।
इसी घटना की स्मृति में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाने की परंपरा प्रचलित हुई। यह कथा संदेश देती है कि अहंकार के बजाय विनम्रता अपनानी चाहिए और प्रकृति तथा समाज के कल्याण को महत्व देना चाहिए।
एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उनके जीवन में गोवर्धन पर्वत, गायों और प्रकृति का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने लोगों को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया।
जब इंद्र को इस बात का पता चला, तो उन्हें क्रोध आ गया। उन्होंने ब्रज में तेज वर्षा और तूफान भेज दिया। लगातार बारिश होने से ब्रजवासियों के सामने संकट खड़ा हो गया।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। ब्रज के लोग, ग्वाल-बाल और गोमाता पर्वत के नीचे आकर सुरक्षित हो गए। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक पर्वत को उठाए रखा और सभी की रक्षा की।
अंततः इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उनका अहंकार समाप्त हो गया। इसके बाद ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आभार व्यक्त किया और उन्हें विभिन्न पकवानों का भोग लगाया।
इसी घटना की स्मृति में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाने की परंपरा प्रचलित हुई। यह कथा संदेश देती है कि अहंकार के बजाय विनम्रता अपनानी चाहिए और प्रकृति तथा समाज के कल्याण को महत्व देना चाहिए।
गोवर्धन पूजा 2026: राशि अनुसार प्रभाव
गोवर्धन पूजा सभी राशियों के लिए भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सकारात्मक संकल्प का अवसर है। इन राशियों के जातक इस दिन विशेष रूप से प्रार्थना कर सकते हैं।
● वृषभ राशि: सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता की कामना के लिए भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें।
● कर्क राशि: परिवार में प्रेम, शांति और आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।
● सिंह राशि: अहंकार से दूर रहकर विनम्रता और विवेक अपनाने का संकल्प लें।
● धनु राशि: ज्ञान, धर्म और सही निर्णय लेने की क्षमता के लिए भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
● वृषभ राशि: सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता की कामना के लिए भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें।
● कर्क राशि: परिवार में प्रेम, शांति और आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।
● सिंह राशि: अहंकार से दूर रहकर विनम्रता और विवेक अपनाने का संकल्प लें।
● धनु राशि: ज्ञान, धर्म और सही निर्णय लेने की क्षमता के लिए भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
अपनी राशि का मासिक राशिफल देखें
आज का दैनिक राशिफल देखें →गोवर्धन पूजा 2026 के शुभ उपाय
- भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री और विभिन्न पकवानों का भोग लगाएं।
- गोमाता की सेवा करें और उन्हें उचित आहार खिलाएं।
- जरूरतमंदों को भोजन, अनाज या वस्त्र दान करें।
- पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- अन्न और जल की बर्बादी न करने तथा प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प लें।
- गोमाता की सेवा करें और उन्हें उचित आहार खिलाएं।
- जरूरतमंदों को भोजन, अनाज या वस्त्र दान करें।
- पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- अन्न और जल की बर्बादी न करने तथा प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प लें।
गोवर्धन पूजा 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
गोवर्धन पूजा 2026 कब है? +
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।
गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है? +
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से सुबह 8:52 बजे तक है।
गोवर्धन पूजा पर किस भगवान की पूजा की जाती है? +
गोवर्धन पूजा पर मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धनधारी स्वरूप की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर और गोमाता की सेवा करके भी यह पर्व मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट क्यों चढ़ाया जाता है? +
अन्नकूट भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आभार और भक्ति व्यक्त करने की परंपरा है। इसमें विभिन्न प्रकार के पकवान, सब्जियां, अनाज और मिठाइयां भगवान को अर्पित की जाती हैं। बाद में प्रसाद श्रद्धालुओं में बाँटा जाता है।







