Yogini Ekadashi 2026: जुलाई 2026 में योगिनी एकादशी कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व, मंत्र, क्या करें और क्या न करें।
Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन आषाढ़ कृष्ण पक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी सबसे पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है, रोगों और कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
यदि आप भी जानना चाहते हैं कि जुलाई 2026 में योगिनी एकादशी कब है, तो इस लेख में जानें योगिनी एकादशी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत का समय, पारण का समय, पूजा विधि, व्रत कथा, धार्मिक महत्व, मंत्र, क्या करें, क्या न करें और व्रत से जुड़े सभी महत्वपूर्ण नियम।
जुलाई 2026 में योगिनी एकादशी कब है?
वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी व्रत शनिवार, 11 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।
योगिनी एकादशी 2026 तिथि:
एकादशी व्रत हमेशा उदयातिथि के अनुसार रखा जाता है, इसलिए इस वर्ष योगिनी एकादशी का व्रत 11 जुलाई को किया जाएगा।
योगिनी एकादशी 2026 सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
योगिनी एकादशी को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली अत्यंत पुण्यदायी एकादशी माना गया है। पद्म पुराण में वर्णित है कि इस व्रत को करने से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को रोग, दुख तथा आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे अत्यंत फलदायी एकादशी माना गया है।
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार अलकापुरी में भगवान शिव के परम भक्त राजा कुबेर निवास करते थे। उनके यहां हेममाली नाम का एक माली कार्य करता था। उसका काम प्रतिदिन मानसरोवर से पुष्प लाकर भगवान शिव की पूजा के लिए देना था।
एक दिन हेममाली अपनी पत्नी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए फूल नहीं पहुंचा सका। इससे राजा कुबेर अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया।
श्राप से पीड़ित हेममाली अनेक वर्षों तक जंगलों में भटकता रहा। अंततः उसकी भेंट महर्षि मार्कण्डेय से हुई। उन्होंने उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
हेममाली ने श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उसका कोढ़ दूर हो गया और उसे श्राप से मुक्ति मिल गई। तभी से योगिनी एकादशी को पापों और रोगों से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी माना जाता है।
योगिनी एकादशी पूजा सामग्री
योगिनी एकादशी पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन क्या करें?
योगिनी एकादशी पर क्या नहीं करें?
योगिनी एकादशी व्रत में क्या खाएं?
योगिनी एकादशी पर क्या दान करें?
योगिनी एकादशी के लाभ
योगिनी एकादशी के शक्तिशाली मंत्र
- ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
योगिनी एकादशी से जुड़े नियम
योगिनी एकादशी 2026 पारण समय
द्वादशी तिथि में हरिवासर समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।
यदि आप 11 जुलाई (गौण/वैष्णव परंपरा) का व्रत रखते हैं, तो 12 जुलाई 2026 को प्रातः लगभग 5:30 बजे से 8:40 बजे के बीच पारण किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
योगिनी एकादशी 2026 का व्रत 11 जुलाई 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन किया जाए, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
11 जुलाई 2026, शनिवार।
भगवान श्रीहरि विष्णु की।
हाँ, श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं।
यह व्यक्तिगत व्रत-परंपरा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। कई लोग फलाहार के साथ चाय लेते हैं, जबकि कुछ केवल फल, दूध और पानी का सेवन करते हैं।
हाँ, फलाहार करना मान्य है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
द्वादशी तिथि में हरिवासर समाप्त होने के बाद शुभ समय में।
2026 में तिथि की स्थिति के कारण अलग-अलग परंपराओं में मतभेद है। कई पंचांग 10 जुलाई को स्मार्त योगिनी एकादशी और 11 जुलाई को गौण/वैष्णव योगिनी एकादशी मानते हैं। अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत स्वास्थ्य, मानसिक शांति, पापों के क्षय, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
हाँ। अधिकांश श्रद्धालु फलाहार या जल के साथ व्रत रखते हैं। निर्जल व्रत केवल वही रखें जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सक्षम हों।
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