Hariyali Amavasya 2026: हरियाली अमावस्या 2026 कब है? जानें सही तारीख, अमावस्या तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व, पितृ तर्पण, शिव पूजा और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय।
Hariyali Amavasya 2026: सावन मास की अमावस्या को मनाई जाने वाली हरियाली अमावस्या हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्वों में से एक है। यह दिन केवल भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का ही नहीं, बल्कि पितरों के तर्पण, पुण्यदायी स्नान, दान-पुण्य, पीपल पूजन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी विशेष अवसर माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान जब धरती चारों ओर हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, तब यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के अटूट संबंध का संदेश देता है।
धार्मिक मान्यता है कि हरियाली अमावस्या के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने, पितरों का तर्पण करने तथा जरूरतमंदों को दान देने से पितृ कृपा प्राप्त होती है, जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। कई स्थानों पर इस दिन वृक्षारोपण, पीपल पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष आयोजन किया जाता है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि हरियाली अमावस्या 2026 कब है, अमावस्या तिथि कब से कब तक रहेगी, स्नान-दान का शुभ समय क्या है, पूजा कैसे करें, कौन-से उपाय करने चाहिए और इस दिन किन कार्यों से बचना चाहिए, तो इस लेख में आपको इन सभी प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे।
हरियाली अमावस्या 2026 कब है? (Hariyali Amavasya 2026 Date)
वर्ष 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इसे सावन अमावस्या भी कहते हैं। यह पर्व सावन मास की अमावस्या तिथि पर पड़ता है, जिसे भगवान शिव की उपासना, पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, शिवलिंग का रुद्राभिषेक, पीपल की पूजा और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान करने की परंपरा है।
हरियाली अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
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विवरण |
समय |
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पर्व |
हरियाली अमावस्या |
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दिन |
बुधवार |
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तारीख़ |
12 अगस्त 2026 |
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अमावस्या तिथि प्रारंभ |
12 अगस्त 2026, प्रातः 01:52 बजे |
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अमावस्या तिथि समाप्त |
12 अगस्त 2026, रात्रि 11:06 बजे |
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स्नान-दान का शुभ समय |
सूर्योदय से अमावस्या तिथि समाप्ति तक |
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विशेष पूजा का समय |
प्रातःकाल एवं प्रदोष काल |
हरियाली अमावस्या क्यों मनाई जाती है?
हरियाली अमावस्या केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध का प्रतीक भी है। यह पर्व सावन मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है, जब वर्षा ऋतु के कारण धरती चारों ओर हरियाली से आच्छादित हो जाती है। इसी कारण इसे 'हरियाली अमावस्या' कहा जाता है।
सनातन धर्म में प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप माना गया है। पेड़-पौधे, नदियां, पर्वत और वनस्पतियां केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवनदाता भी हैं। इसलिए इस दिन भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ वृक्षारोपण, पीपल पूजा और पर्यावरण संरक्षण को भी पुण्यदायी कार्य माना गया है।
धार्मिक मान्यता है कि हरियाली अमावस्या के दिन किए गए शुभ कर्म, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है।
हरियाली अमावस्या 2026 पूजा विधि
यदि आप हरियाली अमावस्या का व्रत या पूजा कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए सरल विधि-विधान का पालन कर सकते हैं।
1. प्रातः स्नान करें
ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
2. पूजा का संकल्प लें
स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें तथा पूजा का संकल्प लें।
3. शिवलिंग का अभिषेक करें
शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करें।
4. मंत्र जाप करें
पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ 'ॐ नमः शिवाय' तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
5. पितरों का तर्पण करें
यदि परिवार की परंपरा हो, तो पितरों के निमित्त तर्पण करें और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करें।
6. पीपल के वृक्ष की पूजा करें
पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु और समस्त देवताओं का वास माना गया है।
7. दान-पुण्य करें
जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, तिल, गुड़ या अपनी सामर्थ्य अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करें।
8. वृक्षारोपण करें
यदि संभव हो तो इस दिन एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण का संकल्प लें।
हरियाली अमावस्या पूजा सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें-
● गंगाजल
● शुद्ध जल
● दूध
● दही
● शहद
● घी
● शक्कर
● बेलपत्र
● धतूरा
● भस्म
● चंदन
● अक्षत
● रोली
● मौली
● धूप और दीप
● रुई और घी
● फल
● फूल
● नैवेद्य
● तिल
● गुड़
हरियाली अमावस्या पर स्नान-दान का महत्व
● धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या तिथि पर किया गया स्नान, जप, तप और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
● हरियाली अमावस्या पर सूर्योदय के बाद पवित्र स्नान कर भगवान शिव की पूजा करने और जरूरतमंद लोगों को दान देने से शुभ फल प्राप्त होता है।
● इस दिन विशेष रूप से अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, फल, छाता, दक्षिणा और गौ सेवा का महत्व बताया गया है।
● ऐसा माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लाता है।
हरियाली अमावस्या पर क्या करें?
हरियाली अमावस्या के दिन किए गए शुभ कार्यों का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन आप निम्न कार्य कर सकते हैं-
● ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
● भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें।
● शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
● 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
● पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान (यदि पारिवारिक परंपरा हो) करें।
● पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाकर दीपक जलाएं।
● गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान दें।
● गौ सेवा करें और पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें।
● एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल का संकल्प लें।
हरियाली अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है-
● किसी का अपमान या अनादर न करें।
● क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहें।
● नशे और तामसिक भोजन का सेवन करने से बचें।
● बिना कारण पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं।
● जरूरतमंद व्यक्ति को खाली हाथ लौटाने से बचें।
● पूजा के समय मन में नकारात्मक विचार न रखें।
हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि को पितरों की तिथि माना गया है। वहीं सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। ऐसे में जब अमावस्या और सावन का संयोग बनता है, तो इस दिन का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
शास्त्रों के अनुसार हरियाली अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का अभिषेक करने, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने, पितरों के लिए तर्पण करने तथा जरूरतमंद लोगों को दान देने से शुभ फल प्राप्त होता है।
हरियाली अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
हरियाली अमावस्या हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति की सेवा भी ईश्वर की सेवा है। जिस प्रकार पेड़-पौधे हमें प्राणवायु, छाया और जीवन प्रदान करते हैं, उसी प्रकार उनका संरक्षण करना भी हमारा धर्म है।
इस दिन एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लेने को भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी है।
हरियाली अमावस्या पर पीपल की पूजा क्यों की जाती है?
सनातन धर्म में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें भगवान विष्णु का निवास होता है तथा अनेक देवताओं का वास माना गया है। हरियाली अमावस्या के दिन पीपल की पूजा करना, जल अर्पित करना और दीप प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है।
हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का महत्व क्या है?
हरियाली अमावस्या का सबसे सुंदर संदेश प्रकृति संरक्षण है। इस दिन लगाया गया पौधा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
वृक्ष हमें प्राणवायु, छाया, औषधियां और स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं। इसलिए इस पर्व पर पौधा लगाना और उसकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लेना प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाता है।
आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण एक वैश्विक आवश्यकता बन चुका है, तब हरियाली अमावस्या का संदेश पहले से भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
निष्कर्ष:
हरियाली अमावस्या केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और सेवा का सुंदर संगम है। यह दिन हमें भगवान शिव की भक्ति, पितरों के प्रति सम्मान, दान-पुण्य की भावना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। यदि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाए, जरूरतमंदों की सहायता की जाए और एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लिया जाए, तो यह पर्व अपने वास्तविक उद्देश्य को सार्थक करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
वर्ष 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
अगस्त 2026 की अमावस्या तिथि 12 अगस्त, बुधवार को है। अमावस्या तिथि 12 अगस्त 2026 को प्रातः 01:52 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात्रि 11:06 बजे समाप्त होगी।
सावन अमावस्या 2026 में 12 अगस्त, बुधवार को पड़ रही है। सावन मास की अमावस्या होने के कारण इसे हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है।
हरियाली अमावस्या भगवान शिव की आराधना, पितरों के सम्मान और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक पर्व है। इस दिन शिव पूजा, स्नान-दान, पितृ तर्पण और वृक्षारोपण करने की परंपरा है।
हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। यह सावन माह की अमावस्या तिथि है और हिंदू धर्म में इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
हरियाली अमावस्या के दिन प्रातः स्नान करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें, पितरों का तर्पण करें, जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान दें तथा एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लें।
हरियाली अमावस्या भगवान शिव की आराधना, पितरों के तर्पण, स्नान-दान और प्रकृति संरक्षण का पर्व है। इस दिन पूजा-पाठ, दान और वृक्षारोपण करने से शुभ फल प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही कई लोग पितरों का तर्पण करते हैं और पीपल के वृक्ष की भी पूजा करते हैं।
अमावस्या तिथि पर स्नान और दान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए दान और पुण्य कर्मों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल का वृक्ष अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन पीपल में जल अर्पित कर दीपक जलाने और परिक्रमा करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
हाँ, अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है।
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